स्नेहमय व्यक्तित्व –ममता कालिया
स्नेहमय व्यक्तित्व –ममता कालिया ‘ममता कालिया, एक ऐसा नाम है जो हिंदी साहित्य लेखन में सर्व स्वीकृत है। उनका मुस्कुराता चेहरा और मिलनसारिता सभी को आकर्षित करती है। मेरे पिता हिंदी के साहित्यकार और आचार्य रहे हैं उपकुलपति भी। अतः उनके कारण ममता जी के लेखन और स्वभाव से परिचित रही। इनकी जोड़ी हिंदी साहित्य…
हिंदी ऐसी भी
हिंदी ऐसी भी “सुनिये, आप मेरा मोबाइल दुकान पर जाकर दिखा लाओ। इसमें बहुत दिनों से राहुल का फोन नहीं आ रहा। शायद अमेरिका का नेट यहाँ काम नहीं कर रहा।”, वेणु हाथ में लिए मोबाइल को किशोरजी को देते हुए बोली। “अरे वेणु..”, कहते हुए किशोरजी बोलते हुए चुप हो गए और मोबाइल लेकर…
भारत के महानायक:गाथावली स्वतंत्रता से समुन्नति की- खुदीराम बोस
खुदीराम बोस जीवन परिचय : खुदीराम बोस का जन्म 03 दिसम्बर 1889 को बंगाल के मिदनापुर जिले के हबीबपुर गांव में त्रैलोक्यनाथ बोस के यहां हुआ था. उनकी माता का नाम लक्ष्मीप्रिया देवी था. केवल 6 वर्ष की उम्र में ही उन्होंने अपने माता पिता को खो दिया था. उनका लालन पालन उनकी बहन करती…
आज बिरज में, होरी रे रसिया
आज बिरज में, होरी रे रसिया होटल के कमरे की बालकनी से समुद्र की मचलती लहरों में खोई बैठी थी कात्यायनी। शुभेन्दु ने आकर कहा ‘हम कल नहीं जा सकते गोवा से।’ लेकिन क्यों… हमारी टिकट तो कन्फर्म है। पूछा कात्यायनी ने। वो … राजभवन से यह आमंत्रण आया है। होली मिलन समारोह में आपका…
गणेश कौन हैं ?
गणेश कौन हैं ? तमाम काल्पनिक देवी-देवताओं और अंधविश्वासों के बीच भी हमारे पुराणों में ऐसी कुछ चीजें हैं जो अपनी दृष्टिसम्पन्नता और सरोकारों से चकित करती हैं। शिव और पार्वती के पुत्र गणेश पुराणों की ऐसी ही एक देन हैं। अपने पिता की तरह गणेश प्रकृति की शक्तियों के विराट रूपक है। उनका मस्तक…
याज्ञवल्क्यस्मृति
याज्ञवल्क्यस्मृति आपने मनु स्मृति का नाम खूब सुना होगा। मगर बहुत कम लोगों ने याज्ञवल्क्य स्मृति का नाम सुना होगा। वैसे तो हिन्दू धर्म में न्याय और सामाजिक व्यवहार पर केंद्र 18 से अधिक स्मृतियां रची गयी हैं। मगर आपको यह जानकर आश्चर्य होगा कि भारत का संविधान बनने से पहले तक हिंदुओं के लिये…
कन्यादान एक विवशता
कन्यादान एक विवशता सामान्यतः मध्यमवर्गीय परिवारों मे लड़कियों के विवाह के लिए आदर्श उम्र स्नातक के बाद से ही मानी जाती है ।ज्यादातर मामलों मे उच्च शिक्षा और भविष्य संबंधी सभी निर्णय लड़की के भाग्य और ससुराल पक्ष के मिजाज पर निर्भर करता है!हमारे साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ, बात उन दिनों की है,…
माँ तेरे सोच जैसा
“माँ तेरे सोच जैसा….” मेरे सारे सपनों को , अपना ही मानकर मेरी परेशानियों में , हाथ मेरा थामकर मुझमें वह एक अटूट विश्वास भरती थी बस , हर वक़्त एक चमत्कार करती थी कब सोती, कब वह जगती , रब ही जाने पर , मिन्नतें दुआयें , वह हजार करती थी अपनी आंखों में…
हँसी बेगम बेलिया
हँसी बेगम बेलिया ज़िद में ही मौसम ने हवाओं को छू लिया हरे-हरे पातों में हँसी बेगम बेलिया सड़कों पर चिड़ियाएँ पेड़ से नहीं उतरीं खाली पाँवों चलती धूप भी नहीं ठहरी साथ रहती समय के नहीं कुछ भी किया चाँदनी में भींगी पानी नाली नदियाँ रिश्ता ही बनाती है ये आती जो सदियाँ…