करवा चौथ का चाँद आया

करवा चौथ का चाँद आया देख सखी दूर हुआ तमस मन कमल खिला उद्गार संग घिरी थी कालिमा चहुँ ओर नभ दमके सखी चाँद आया खिल रहा था चाँद हर माह निराशा भय का जैसा प्रहर अद्भुत ज्योति है हटा धुंध करवा चौथ का चाँद आया चाँदनी की ओढ़नी लहराते नयन खिले स्निग्ध मुस्कान अमृत…

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माता तुम अनुपम प्यार

माता तुम अनुपम प्यार प्रकृति का अनुपम उपहार मातृत्व से भरी कोमल नार जननी ममतायी अमृत रसी कोमलांगी माता शक्ति सार नित्य कष्ट सह जाती है माते संतान की पीड़ा हरती हजार ममता रोम रोम में बसता क्या व्याख्या कैसे हो उद्गार समर्पण माँ का अद्भुत भाव जिसको ना हो माप व् भार माँ तो…

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विषाद

विषाद बड़ी मुश्किल से वीजा मिला था – तीन महीनों के लिए। स्टुडेंट एक्सचेंज प्रोग्राम में। ऑक्सफोर्ड की बात ही अलग है। तीन महीने काम, फिर एक महीने के लिए रश्मि आ जाएगी और वो थोड़ा घूम लेंगे। इंग्लैंड जाने का उसका बहुत पुराना सपना था और वह किसी भी तरह उसको हासिल करना चाहता…

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वो धुकधुक 

वो धुकधुक    “रात के दस बज गए, आज फैक्ट्री में कुछ ज्यादा ही देर हो गई!” घना सन्नाटा उसे दबोचकर जैसे उस पर हावी होना चाहता था मगर घबराती गरिमा स्ट्रीट लाइट की रोशनी की आड़ में अपनी चुन्नी से सिर ढक चेहरा छुपाती हुई बस स्टॉप की ओर जल्दी-जल्दी तेज कदमों से कभी…

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मैं आप की बेटी हूँ

मैं आपकी बेटी हूँ मैं उन सब बेटियों की तरफ से लिख रही हूँ जिन्हें अपनी बात रखने का कभी मौका नहीं मिला। कभी संकोचवश, कभी आदतन। घर की दहलीज के भीतर रहने वाली बेटियाँ, कदमताल पर आगे चलने वाली बेटियाँ — कुछ व्यथाएँ अनकही रह गई। लेकिन बाबा, अब्बू, बाबू जी, पापा की लाड़ली…

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अतिथि एक दिन का

अतिथि एक दिन का अच्छी भली सो रही थी और सपनों में ,पर्वतों के पार दूर कहीं क्षितिज पर सैर कर रही थी कि अचानक ही धीमे से तेज … और भी तेज होती “खट – खट” की आवाज़ ने आराम करती हुई पलकों को जबरदस्ती खोल ही दिया । मैं भी किसी प्रकार उनींदी…

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माँ

माँ बच्चो के चुप होने से, वो बात समझ जाए बच्चो की उदासी पर, खुद आँसु बहाए वो हमारी माँ कहलाए… अपनी थकान को वो ना बताए दर्द को अपने छुपाती जाए एक आवाज देने पर वो उठ जाए वो हमारी माँ कहलाए… मायके की याद को सीने मे दबाए सबकी चिंता मे वो ना…

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रोबोट

रोबोट इस आधुनिक शिक्षा प्रणाली ने बच्चों को रोबोट बना दिया हैं।नन्हें-नन्हे कंधों पर भारी बस्तें और स्कूल से आते ही कोंचिग जाने की तैयारी,वहां से आकर होमवर्क के बाद जल्दी सुलाने की कवायद। अपने छोटे से पोते-पोती की दिनचर्या देखकर सविता मन ही मन कुढ़ती और बच्चों पर बेहद तरस आता। लेकिन कुछ कह…

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