ओ सितंबर

ओ सितंबर ओ सितंबर ! तुम आ ही गए. गुनगुनाते से कुछ छोटे होते दिन और मीठी सी सिहरन वाली लंबी रात लिए. ठहरी हुई हवा एक भूला-सा नगमा सुना रही है. चिनार ने फिर बिखरा दी है एक सुनहरी चादर….. पत्तो के बदलते रंग जैसी ख्वाहिशें भी कुछ और अमीर हो गयी हैं. पेड़ो…

Read More

हरि अनंत हरिकथा अनंता

हरि अनंत हरिकथा अनंता तुलसीदास के ‘हरि अनंत हरिकथा अनंता’ की तरह ही विविध आयामी और नवों रसों से भरपूर रामकथा भारत ही नहीं, विश्व के कई देशों में प्रचलित है। असल में देखा जाए तो आदिकवि वाल्मीकि कृत रामायण में जिन-जिन स्थानों का उल्लेख है, भौगोलिक उन सभी क्षेत्रों में साहित्य और संस्कृति के…

Read More

भजन

    भजन हर शाम की तरह इस शाम भी पार्क में काफी चहल-पहल थी ।पार्क के बीचोंबीच एक गोलाकार छज्जेदार चबूतरा सा बना था।प्रत्येक शुक्रवार को शाम छः से सात बजे तक वहां पर भजनों का कार्यक्रम चलता था। आस-पास रहने वाली औरतें जमा हो कर भजन गाती थीं । आज भी भजन चल…

Read More

उम्मीद की टिमटिमाती लौ

उम्मीद की टिमटिमाती लौ हुक्का चिलम बनवा लो , गले का हार बनवा लो , हाथ की घडी़ बनवा लो…… चिल्लाते हुए दढ़ियल बाबा हर उस जगह ज़रा दर और ठहर जातें , जहाँ बच्चे खड़े होते थें । ” घर के बड़े चिढ़ कर कहतें … … ये लो जी , आज फिर आ…

Read More

महात्मा गांधीजी के महत्वपूर्ण विचार

महात्मा गांधीजी के महत्वपूर्ण विचार सर्वप्रथम महात्मा गांधी जी के संबंध में जानकारी ;मोहनदास करमचन्द गांधी (२ अक्टूबर १८६९ – ३० जनवरी १९४८) भारत एवं भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के एक प्रमुख राजनैतिक एवं आध्यात्मिक नेता थे। वे सत्याग्रह (व्यापक सविनय अवज्ञा) के माध्यम से अत्याचार के प्रतिकार के अग्रणी नेता थे, उनकी इस अवधारणा की…

Read More

आज बिरज में, होरी रे रसिया

आज बिरज में, होरी रे रसिया होटल के कमरे की बालकनी से समुद्र की मचलती लहरों में खोई बैठी थी कात्यायनी। शुभेन्दु ने आकर कहा ‘हम कल नहीं जा सकते गोवा से।’ लेकिन क्यों… हमारी टिकट तो कन्फर्म है। पूछा कात्यायनी ने। वो … राजभवन से यह आमंत्रण आया है। होली मिलन समारोह में आपका…

Read More

मेरे प्रिय तुम गुलाब हो!

मेरे प्रिय तुम गुलाब हो! नेहरू के कोट से चलकर, प्रियतमा के जूड़े में अठखेले, रंग बिरंगे चाहे जितने हो, पर, सुर्ख लाल में हो अलबेले, मादकता की तुम हो परिभाषा, तुम सुहाग सेज की अभिलाषा, मेरे प्रिय तुम गुलाब हो! हो न ! सुधा गोयल ‘नवीन’ 0

Read More

कैक्टस

कैक्टस दस दिन के दुधमुँहे मुन्ना को गोदी में लिए, देहरी पर खड़ी संचिता, कुछ अधिक खीझ और कम भय के साथ सामने बैठक में दीवान पर लेटे सचिन को देख रही थी। उसकी सास मनियादेवी अभी-अभी पैर पटकती इसी देहरी से बाहर निकली हैं। उनके स्वर का ताप संचिता के समूचे तन से लिपटा…

Read More

महारानी विक्टोरिया

महारानी विक्टोरिया यूँ तो माँ भारती की वीरभूमि में कई महानायिकाओं ने जन्म लिया है। किन्तु विश्वमंच भी ऐसी कई महान विभूतियों से भरा पड़ा है। झोपड़ी से लेकर महलों तक में इन वीरांगनाओं की प्रखर ओजस्वी गाथाएँ आज भी गाई जाती हैं। इनकी विशेषताओं और जज़्बे ने इतिहास रच डाला है। भारत की रानी…

Read More