मन्त्र

मन्त्र आदर्शोन्मुख यथार्थवाद के पक्षधर मुंशी प्रेमचंद जी अपनी मनोवैज्ञानिक धारणा को प्रतिष्ठित करके पाठकों के जिस तरह से सम्मुख रखते थे वह अपने आप में विचारणीय है । प्रेमचंद की अमूल्य योगदान से आज कहानी विधा विषय का स्वरूप आदर्शवाद शिल्प की दृष्टि से नए-नए आयामों को आत्मसात करती हुई संतोषजनक पड़ावों को तय…

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भोर की प्रतीक्षा

भोर की प्रतीक्षा आज प्लेटफार्म पर कुछ ज्यादा ही भीड़ थी,शायद कोई रैली जा रही थी..पटना,लोग दल के दल उमड़े चले आ रहे थे ,हाथों में झंडे ,छोटे बड़े झोले,गठरियाँ लादे हुए …मुफ्त में यात्रा कर ,कुछ रूपये बचाने के लिए बेबस मजबूर लोग भी थे।तोकुछ ऐसे लोग भी थे जो रैली के बहाने बिना…

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जीने की ललक

जीने की ललक रेमडेसिविर दिया जा चुका था। डॉक्टर को उम्मीद थी वो बच जाएगा। मगर आज उसका ऑक्सीजन लेवल बहुत गिर गया था। वो बार बार ऑक्सीजन मास्क को उतार फेंक रहा था। और एक ही रट लगाए जा रहा था, “मैं नहीं बचूँगा मुझे घर जाने दो बच्चों को एक बार देख लेने…

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विवेकानंद एक विचारक 

विवेकानंद एक विचारक  धर्म की गहराई को जानने के बाद उन्होंने विश्व में अध्यात्मिक क्रांति छेड़ दी। पश्चात जगत में सनातन धर्म वेदों तथा ज्ञान शास्त्र से विश्व को परिचित कराया। वर्षो से सनातन हिन्दू धर्म पर अनेकानेक आघात किये गए पर उसे समाप्त नहीं किया जा सका।क्योकि सनातन धर्म जीवन है । उन्होंने बताया…

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ये जंग भी हम जीतेगें

ये जंग भी हम जीतेगें क्या तुमने सोचा था कभी, कि ऐसा समय भी आएगा। ये कोरोना वायरस दुनिया को, अलग सा अनुभव दे जाएगा। पूजा की थाली ना होगी, बन्द होंगे पूजा के द्वार। मन्दिर में प्रसाद न होगा, होगी ना भक्तों की कतार। पिता का आँगन, माँ का खाना, मैके की बस रहेगी…

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मां शारदे

मां शारदे जय मां शारदे,हे मां शारदे, हम सबको शुभ वर दे, विद्या का असीम भंडार भर दे, गागर में सागर भर दे, तू तो ज्ञान का रुप है, अज्ञानता का अंधकार मिटा दे, जीवन को सार्थक कर दे, हम सब सुंदर सृजन करें, संस्कारों से शोभित कर दे, विद्या का वरदान दे, तूने ही…

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मेरी पीढ़ी का सच

मेरी पीढ़ी का सच कहा जाता है एक व्यक्ति अपने जीवन में पाँच जीवन जीता है,देखता है और समझता है।दादा-नाना से लेकर नाती- पोते तक पर सबसे अधिक लगाव मनुष्य को अपनी पीढ़ी से ही होता है। देश की स्वतंत्रता के वे प्रारंभिक दिन थे।बचपन उसका भी था और मेरा भी।उत्साह और उमंग से भरे…

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बसंत

बसंत आया बसंत हर्षित हुए अनंग धरती का मगर देख हाल सिकुड़ा किंचित मस्तक भाल दिल्ली में जब देखा तनाव बदले अपने मन के भाव किया उन्होंने एक एलान लड़ूंगा अबकी मैं भी चुनाव दिखाऊंगा अपना प्रभाव रति लाना मेरा धनुष बाण सुनो सब मेरा संकल्प पत्र मैं ही हूं बस तुम्हारा विकल्प तुम भी…

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लॉकडाउन के पश्चात रोजगार और व्यवसाय के नये अवसर

“लॉकडाउन के पश्चात रोजगार और व्यवसाय के नये अवसर” “खेती न किसान को भिखारी को न भीख भली, वनिक को वनिज न चाकर को चाकरी। जीविकविहीन लोग सिद्यमान सोच बस, कहैं एक एकन सो ‘कहाँ जाइ का करी’।।” तुलसीदास ने भले ही ये पंक्तियां सोलहवीं शताब्दी के परिस्थितियों को देखते हुए रचा हो किन्तु ये…

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कैसा गणतंत्र कैसी आज़ादी

कैसा गणतंत्र कैसी आज़ादी सोने की चिड़िया कहलाये जाने वाला मेरे सपनों का भारत क्यों बदल गया जहां हर कोई बेहाल जहां हर कोई घायल लादे आज़ादी और गणतंत्र का बोझ बोझिल कांधों पर गणतंत्र कैसा ये गणतंत्र आज़ादी कैसी ये आज़ादी जहाँ आज भी धर्म पर होते बवाल कई न आज़ादी मंदिर की न…

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