मात देने को

मात देने को विश्व के सम्मुख बड़ी विपदा खड़ी है मात देने को मगर हिम्मत अड़ी है। खौफ से मासूमियत भी कैद घर में खेल का मैदान तकता रास्ता है ओढ़ चुप्पी कह रही सुनसान सड़कें भूल मत तेरा हमारा वास्ता है अब तरीके युद्ध लड़ने के अलग हैं ये लड़ाई बैठ कर घर मे…

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अब न सहूँगी

अब न सहूँगी मारपीट अब बहुत हो गई ओछी हरकत अब न सहूँगी खौफ़ दिया क्रूर कर्मों से भँडास निकाली जी भर कर रोई मैं चुपचाप अकेले करवट बदली रात-रात भर पर न बहाऊंगी सावन अब बिजली बन कर कड़कूँगी मैं वार किया तो चुप न रहूँगी मारपीट अब बहुत हो गई ओछी हरकत अब…

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गृह दाह

गृह दाह हिंदी साहित्य के एक आधार स्तभं और अभिन्न अंग के रूप में मुंशी प्रेमचंद की ख्याति केवल भारत ही नहीं अपितु विश्व भर में फैली है। अपने सरल, सहज और स्वाभाविक लेखन से उन्होंने जनमानस के हृदय पर भारत के समाज ,उसके संस्कार , रिवाजों , आदर्शों के साथ – साथ भावपूर्ण कथाओं…

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हमारी सांस्कृतिक ‌भूमि अयोध्या नगरी 

हमारी सांस्कृतिक ‌भूमि अयोध्या नगरी  परमपुज्य‌ अनंतश्री‌ विभूषित योगी सम्राट श्री श्री‌ १०००८. श्री‌ देवरहा बाबा ‌जी महाराज ‌ने वर्षों ‌पूर्व प्रयाग‌राज‌‌ के कुंभ के‌ मेले‌ मे‌ संतो‌ ,राजनितिज्ञों और‌ आम‌ जनता की जिज्ञासा एवं प्रार्थना को स्वीकार करते हुए ये सांत्वना ‌दी थी कि‌,,,”अयोध्या ‌मे‌ं राम‌जन्मभूमि पर‌‌ मंदिर का‌ निर्माण अवश्य ‌होगा‌। जन जन…

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कोरोना वायरस से मुक्ति

कोरोना वायरस से मुक्ति पूरा विश्व अभी कोरोना वायरस के दुष्प्रभाव से परेशान है और सभी यह जानना चाहते हैं कि भारत और विश्व इस संक्रमण से कब मुक्त होगा । वर्तमान में कर रहे गोचर और ग्रहों की स्थिति को देखें तो यह पाएंगे कि राहु अपने उच्च की राशि मिथुन में गमन कर…

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क्या खोया क्या पाया

क्या खोया क्या पाया (इस लॉकडाउन में) विश्वव्यापी कोरोना महामारी के कारण जिस दिन पूरी तरह से लॉकडाउन की घोषणा की गई, लगा जीवन थम गया। जीवन की बिल्कुल ही नई परिस्थिति और डर ने मिल कर एक अजीब सा माहौल बना दिया था जो खुशगवार तो नहीं था, सबकुछ उलट पुलट सा गया था।…

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दिखता

दिखता घर के बाहर गली गली में सन्नाटा सा पसरा दिखता बन्द हो गया हाथ मिलाना करे दूर से सभी नमस्ते शोर शराबा कहाँ खो गया पूछ रहे हैं हमसे रस्ते समय भूलकर अपनी गति को एक जगह ही ठहरा दिखता ऑफिस घर में स्कूल घर में बदल गई दिनचर्या सारी उलझन अब तक सुलझ…

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माँ

माँ मां की महिमा कोई कैसे कहे । है अपरंपार जगत में माँ ।। हर मुश्किल का हल है माँ । अनगिन पुण्यों का फल है माँ ।। अपनी हर संतान की खातिर। अमृत सा प्रभावी जल है माँ ।। माँ के जैसा कोई और नहीं मां के जैसी माँ ही है ना ।। है…

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मधुमास

मधुमास मधुर मधुर मधुमास खिला मन पुलकित उल्लास मिला। भासमान है सूर्य बिम्ब चल रहा साथ निज प्रतिबिम्ब। प्रकृति ओढ़ी है नव दुकूल मन में उठते हैं भाव फूल। कोकिला करे कुहू पुकार गायें भी भरती हुंकार। मन वासंती जागे उमंग बह रही ख़ुशी की नव तरंग। दे रही थाप गोरी पी के संग चढ़…

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