ब्लड प्रेशर का नियंत्रण अपने हाथों में लें
ब्लड प्रेशर का नियंत्रण अपने हाथों में लें आज के समय में उच्च रक्तचाप एक आम समस्या बनती जा रही है और आंकड़े डराने वाले हैं ।आपको जानकर हैरानी होगी कि अभी भी कई लोग ऐसे हैं जिन्हें यह पता नहीं कि उन्हें ब्लड प्रेशर की शिकायत है। यही नहीं जिन्हें ब्लड प्रेशर पता भी…
निर्मला
निर्मला आदरणीय प्रेमचंद जी एक महान साहित्यकार थे। उनकी सभी रचनाएं बहुत अच्छी हैं परंतु उन सब में मुझे उनका ‘निर्मला’ उपन्यास सबसे अधिक पसंद है। ‘निर्मला’ बेमेल विवाह और दहेज प्रथा की दुखान्त कहानी है। उपन्यास का लक्ष्य अनमेल-विवाह तथा दहेज़ प्रथा के बुरे प्रभाव को अंकित करता है। निर्मला का विवाह एक अधेड़…
ब्रह्मांड
ब्रह्मांड तूने रचा ऐसा ब्रह्मांड ईश्वर मेरे लिऐ। रहने को धरती दी , नक्षत्रों से भरा आकाश। सूर्य, चन्द्र, नदी, वन ,उपवन वायु प्राण आधार तूने रचा ऐसा ब्रह्मांड, ईश्वर मेरे लिऐ। सूर्य, चन्द्र समय से आते, ऋतुएं भी आती और जाती। फल फूल समय से खिलते, अन्न का भरा भंडार तूने रचा ऐसा ब्रह्मांड,…
संवेदनशील कलम की धनी-टोनी मोरिसन
संवेदनशील कलम की धनी-टोनी मोरिसन टोनी मोरिसन एक प्रख्यात अमेरिकी कवयित्री, नाटककार, और उपन्यासकार थीं। मॉरिसन ने अफ्रीकी अमरीकी जीवन को गहराई से जिया और उनमें से कहानियाँ गढ़ कर लोगों के सामने रखा। उनका लेखन मनोरम, काव्यमय गद्य का बेहतरीन उदाहरण है। यूँ तो सुरुचिपूर्ण लेखन में उनका परम विश्वास था, परन्तु जो…
Luce
Luce The moons adorn your balcony tonight are your beacons. When lost from your field of vision they will be there and let them not bother you you will feel their lava cooling down your body the divine light caressing your fingertips secretly revealed to the elite who will turn it into poetry and they…
हिन्दी है अभिमान
हिंदी है अभिमान हिंदी हिंदी प्यारी हिन्दी हिन्दी है अभिमान जग जग में गूंजे ये है, हमको हैअभिमान मीठे बोली लगती हिन्दी, प्रेम रस बरसाती है अनजाने भी मीठे कंठ से बोले है हिंदी महान प्रेम पाठ पढ़ाती है देश को, देश से मिलाती है हिंदी देश की शान है हम सबको अभिमान है भाषाओं…
“ मैं भी एक महिला हूं”: सोजॉर्नर ट्रुथ
“ मैं भी एक महिला हूं”: सोजॉर्नर ट्रुथ आज जिस महान महिला शख्सियत की हम बात करने जा रहे हैं, उनके व्यक्तित्व के बारे में जब मैंने पहली बार(कोई सात-आठ साल पहले) पढ़ा था। तो उस समय न ही सिर्फ़ मेरे रोंगटे खड़े हो गए, बल्कि साथ ही साथ मन एक अन्जाने गर्व से भर…
जात न पूछो साधू की….
जात न पूछो साधू की…. वातावरण की गंभीरता को अपने अंदर समेटते हुए मंत्र गूंज रहा था… न जायते म्रियते वा कदाचित् नायं भूत्वा भविता वा न भूयः। अजो नित्यः शाश्वतोऽयं पुराणो न हन्यते हन्यमाने शरीरे॥ गंगा जब यह मंत्र पढ़कर नानाजी की तेरहवीं के कर्मकांड करवा रही थी, तब मुझे लगा कि अब नानाजी…