एक और स्वप्न

एक और स्वप्न बाहर तेज गर्जना के साथ बारिश हो रही थी, रात गहराने लगी थी। मैं भी रसोई और अन्य सारे कार्यों से निपट कर बस बिस्तर पर पड़ ही जाना चाह रही थी कि अचानक फोन की घंटी बज उठी। उधर नयना दीदी थी, भर्राई हुई आवाज में उन्होंने कहा-“प्रोफ़ेसर साहब नहीं रहें।”मैं…

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सशक्तिकरण नहीं एकीकरण

सशक्तिकरण नहीं एकीकरण यदि बात करें महिला दिवस की तो मुझे लगता है कि, महिलाओं का कोई एक दिन नहीं हैं उसके तो सभी दिन है। महिलाओं के बिना तो कोई दिन होता ही नही।उसके उठने से ही हर घर की सुबह होती है और उसके आंख बंद करने पर रात। लेकिन हां यदि महिलाओं…

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विश्व रंगमंच दिवस

विश्व रंगमंच दिवस के. मंजरी श्रीवास्तव थिएटर और कविता का जाना-माना नाम है. मंजरी इसलिए विशेष हैं कि वे थिएटर नहीं करतीं बल्कि थिएटर करनेवालों की बखिया उधेड़ती हैं अर्थात नाट्य समीक्षक हैं, नाट्य आलोचक हैं और एक मुकम्मल शब्द में कहें तो नाट्यविद हैं, कलामर्मज्ञ हैं. मंजरी पिछले 17 वर्षों से दिल्ली में रह…

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सूर्यग्रहण

सूर्य ग्रहण आषाढ़ कृष्ण पक्ष अमावस्या वार रविवार (21 जून 2020) को (चूड़ामणि योग) कंकणाकृती सूर्य ग्रहण भारत में दिखाई देगा एवं यह मध्य अफ्रीका, दक्षिणी प्रशांत महासागर, हिंद महासागर, चीन ताइवान, अरब क्षेत्रों में, ओमान, पाकिस्तान आदि क्षेत्रों में भी देखने को मिलेगा यह भारत के शहर चमोली देहरादून जोशीमठ कुरुक्षेत्र सिरसा सूरतगढ़ आदि…

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आ लौट के आ…

आ लौट के आ… उफ्फ बारह बज गये। एक लम्बी सांस ले उसने लैपटॉप शट ऑफ किया और दोनो हाथ ऊपर कर उंगलियां एक –दूसरे में फंसा चटका दीं। चटर- चटर की आवाज के साथ ही एक पुरानी याद कहीं भीतर कुनमुनाई और दादी का सफेद बालों से घिरा ममतालू चेहरा हवा में उभर आया।होती…

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वतन से दूर

वतन से दूर वतन से दूर हूँ लेकिन अभी धड़कन वहीं बसती… वो जो तस्वीर है मन में निगाहों से नहीं हटती… बसी है अब भी साँसों में वो सौंधी गंध धरती की मैं जन्मूँ सिर्फ भारत में दुआ रब से यही करती… बड़े ही वीर थे वो जन जिन्होंने झूल फाँसी पर दिला दी…

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यू आर माय वैलेंटाइन

यू आर माय वैलेंटाइन मैं और तुम दो अलग अलग चेहरे दिल शरीर जान आत्मा व्यक्तित्व परिवार दोस्त वातावरण फिर भी हम ऐसे एक दूसरे मे यूं समाहित हुए मेरा सब कुछ हुआ तेरा तेरा सब कुछ हुआ मेरा तेरा मान सम्मान स्वभिमान सुख दुःख सफलता धन सम्पत्ति परिवार जिम्मेदारी हुई मेरी और मेरी हुई…

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हम हिन्दुस्तानी की है शान

हम हिन्दुस्तानी की है शान प्यारी “मां” की बिंदी । सबकी प्यारी हिंदी।। भारत वर्ष में चारों ओर बोलने वाली अनगिनत भाषाओं में यह कहना की कौन सी भाषा अधिक व कौन सी कम बोली जाती है। उत्तर भारत में हमेशा से ही हिन्दी बोली जाती हैं कि । अनेकों लेखक ,कवि ,संतों ने हिंदी…

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