मन मंदिर में बस गए राम

मन मंदिर में बस गए राम अयोध्या में आयी पुण्य बेला, साकार हुई जो बसी छवि। दिशाएं सुरभित, देव मगन, विस्मित, हर्षित है आज रवि। भक्तों के सपने आकार ले रहे, पीयूषवन्त छवि नयनाभिराम। मन मंदिर में बस गए राम। लंबे संघर्ष का विकट काल, भूला नहीं रक्तिम इतिहास। प्राणों की आहुतियाँ पड़ी यहाँ, तब…

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भारत के महानायक:गाथावली स्वतंत्रता से समुन्नति की- खुदीराम बोस

खुदीराम बोस जीवन परिचय : खुदीराम बोस का जन्म 03 दिसम्बर 1889 को बंगाल के मिदनापुर जिले के हबीबपुर गांव में त्रैलोक्यनाथ बोस के यहां हुआ था. उनकी माता का नाम लक्ष्मीप्रिया देवी था. केवल 6 वर्ष की उम्र में ही उन्होंने अपने माता पिता को खो दिया था. उनका लालन पालन उनकी बहन करती…

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संदेशे आते हैं

संदेशे आते हैं   नव वर्ष के अनेक सन्देश मेरे मोबाईल पर दोस्तों और रिश्तेदारों के आये। सबों को यथोचित धन्यवाद ,शुभकामनाएं भेजती जा रही थी। कुछ ऐसे भी नंबर थे जो अपरिचित थे पर शुभकामनाएं ही तो दे रहा है बेचारा जो भी है यह सोच कर प्रत्युत्तर दे रही थी। अचानक एक सन्देश…

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सूर्योपासना का महापर्व: लोकपर्व छठ

सूर्योपासना का महापर्व: लोकपर्व छठ आस्था की भावभूमि भारत, जहाँ संस्कृतियों की महानदी आकर एकाकार हो जाती है, जहाँ जीवन त्योहारों, लोकपर्वों, परंपराओं की रंगोली से सदैव सुशोभित होता रहता है, ऐसे’ विविधता में एकता ‘ वाले देश की अपनी विशिष्टता है- विविध प्रांतों की अपनी-अपनी क्षेत्रीय संस्कृति, उस संस्कृति के अनुरूप मनाए जाने वाले…

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Food In Train

जाने क्या है IRCTC की यत्रीयों के लिए खाने की ऑनलाइन बुकिंग की नयी योजना

ट्रेन मेंअपनी सीट पर मंगवाना चाहते हैं फ़ूड , IRCTC एप्रूव्ड के इस ऐप से करें ऑनलाइन ऑर्डर। लंबी दूरी की यात्रा में IRCTC ट्रेन में भी भोजन मंगवाने की सुविधा देता है।  इसके लिए इसने देशभर में बहुत से रेस्टोरेंट्स के साथ पार्टनरशिप की है।  यात्रा शुरू करने या यात्रा के दौरान आप Food…

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कोरोना के बाद की दुनिया

कोरोना के बाद की दुनिया पिछली सदी के दो विनाशक महायुद्धों ने हमारी दुनिया की राजनीति और अर्थव्यवस्था को बहुत हद तक बदला था। विश्व इतिहास में पहली बार कुछ ऐसा हुआ है जिसने राजनीति और अर्थतन्त्र के साथ लोगों का जीवन और जीने के तरीके भी बदल दिए हैं। महामारियां पहले भी आती रही…

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जिंदगी आपकी फैसला आपका

जिंदगी आपकी फैसला आपका शराब की दुकानें खुल चुकी है।जनता ने एक बार फिर सरकार को कटघरे में खडा कर दिया है । समझ नहीं आ रहा रोटी जरूरी है या शराब कोई कह रहा है ।मजदूर लोग जो रोटी के लिए पहले ही तरस रहे थे । अब अपने घरों में लड़ाई झगड़ा कर…

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अब नहीं, तो कब ?

अब नहीं, तो कब ? बस के बगल वाली सीट बहुत देर से खाली थी। बस खुलने में अभी सात-आठ मिनट और रहे होंगे। खिड़की से बाहर की गहमा गहमी देख रही थी मृदुला। ऐसे हमारे यहाँ जैसा शोर वहाँ नहीं है। हमारे यहां तो चीखते खोमचे वाले, व्यस्त कुली, शोर करते बच्चे, झगड़ते परिवार…

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