प्रेम-रुमानियत से रुहानियत

प्रेम- रुमानियत से रुहानियत प्रेम ने अपनी जादुई किरणों से मेरी आँखें खोलीं और अपनी जोशीली उँगलियों से मेरी रूह को छुआ तब….जब उठ गया था प्रेम या प्रेम जैसे किसी शब्द पर से मेरा विश्वास प्रेम ने दुबारा मेरी ज़िन्दगी के अनसुलझे रहस्यों को खोलने का सिलसिला शुरू किया फिर से उन अनोखे पलों…

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इसके बाद

इसके बाद महामारी बची आँखों को दे जायेगी भविष्य में देखने वाली तीसरी आँख कटेंगी हाथ की हथेली में समान्तर चलने वाली दो जीवन रेखाएँ अनिवार्य होगा भूख के अर्थशास्त्र में श्वाँसो का निवेश नये इतिहास में सर्वाधिक गतिशील होंगी वर्तमान के कारावास में बंदी तारीखें काट कपट के बीज से उगे उन्मादी विषैले फल…

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नारी !

नारी ! प्रेम और ममता की मूर्ति त्याग और बलिदान का एहसास निज आंचल में समेटे सारी धरती सारा आकाश! जिसकी आंखों में है करुणा सहनशक्ति है जिसकी परिभाषा, निराशा के तम की जो दूर करे नारी ही है वो आशा!! नारी! पहचान है कोमल भावनाओं की तो कभी कठोरता की गर ये जननी है…

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रश्मिरथी: राष्ट्रकवि की रचनाओं में मेरी अति प्रिय रचना

रश्मिरथी: राष्ट्रकवि की रचनाओं में मेरी अति प्रिय रचना युगधर्मा, शोषण के विरुद्ध विद्रोह को अपनी कलम की वाणी बनाने वाले , जीवन रस को ओज और आशावादिता से पूरित करने वाले, सौंदर्य और प्रेम के चित्र को भी अपने कलम की कूची से रंगने वाले रामधारी सिंह ‘दिनकर’  हिन्दी के एक प्रमुख राष्ट्रवादी एवं प्रगतिवादी…

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World environment day/nachiket parmar

  इस  चित्र को बारह वर्षीय  नचिकेत परमार ने बनाया है जिस में उन्होंने बेहद खूबसूरत, स्पष्ट और  सार्थक संदेश के साथ  चेतावनी भी दिया हैं। नचिकेत परमार विश्व पर्यावरण दिवस विध्वंसक नही संरक्षक बने समस्त ब्रह्माण्ड मे खरबो खरबो मिलों तक फैले आकाशगंगा मे जीवन का नमोनिशान नहीं न उपस्थित प्राणवायु न ही जल…

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सरला मेहता की कविताएं

  सरला मेहता की कविताएं 1.ये ध्वज कभी झुका नहीं स्वतंत्रता की चाह में शताब्दी गुजार दी इक सिपाही पांडे ने चिंगारी जो सुलगाई थी सर पे कफ़न बांधकर बादल पे होकर सवार लक्ष्मी अकेली चल पड़ी जागीरों के मोह में घर के भेदिये छुपे रहे रानी कभी थकी नहीं ये ध्वज कभी झुका नहीं…

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बिना धड़ की भूतनी

बिना धड़ की भूतनी पिछले दस साल से मेरा एक ही मकसद था, आते जाते लोगों को तंग करना। रात को और गर्मियों की दोपहर में जब सड़कें सुनसान हो जातीं थीं तो मैं इसी तलाश में रहती थी कि कोई मेरे पास से गुज़रे और मैं उसे परेशान करूँ। जब लोग हैरान होते थे,…

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विजयी भारत

विजयी भारत आप में से बहुतों ने १९६२ का युद्ध देखा होगा व उसकी कहानियां भी सुनी होंगी।मेरे भी ज़हन में आज कई दिनों से वो १९७५ का पाकिस्तान व भारत के युद्ध जिसके “सायरन” की गूंज,वो मेरे घर की छत से जहाजों की फर्राटेदार उड़ानें और उस पर हम दोनों बहनों को मां और…

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स्वास्थ्य ही धन है

स्वास्थ्य ही धन है हे मानव! जो करते हो अपने जीवन से प्यार, तो सदा ही बनाना अनुशासित आधार। सुबह सवेरे उठकर करना थोड़ा सैर, देर तक सोने से रखना सदा बैर। नित्यकर्म से होकर निवृत्त तुम, थोड़ा करना कसरत योगासन भी तुम। तन को भोजन सदा सरल देना, पानी जूस पदार्थ तरल पीना। खान-पान…

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