रमजीता पीपर

रमजीता पीपर रमजीता पीपर से गाँव की पहचान है या गाँव से इस पीपल के पेड़ की इसके बारे में दद्दा से ही पता लग सकता है। दद्दा की उम्र बहुत अधिक नही है, यही 70 के लगभग, पर लोग उन्हें दद्दा कहने लगे हैं, शायद उनके ददानुमा कहानियों और बातों के कारण हो, या…

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भोर की प्रतीक्षा

भोर की प्रतीक्षा आज प्लेटफार्म पर कुछ ज्यादा ही भीड़ थी,शायद कोई रैली जा रही थी..पटना,लोग दल के दल उमड़े चले आ रहे थे ,हाथों में झंडे ,छोटे बड़े झोले,गठरियाँ लादे हुए …मुफ्त में यात्रा कर ,कुछ रूपये बचाने के लिए बेबस मजबूर लोग भी थे।तोकुछ ऐसे लोग भी थे जो रैली के बहाने बिना…

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नयी दिशा

नयी दिशा धूप-गुगुल के सुगंध से सुवासित और स्त्रियों के शुभ मंगल गान से गुंजायमान था हरिपुर गांव का वातावरण। लाल-पीली साड़ियों में स्त्रियाँ, धोती-कुर्ते में पुरुष और रंग-बिरंगे परिधानों में सजे बच्चे-बच्चियाँ उत्सव सा माहौल बना रहे थे,उनके परिधान सुख-समृद्धि की गवाही दे रहे थे।सब के चेहरे से संतुष्टि और खुशी झलक रही थी।अवसर…

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इस्तीफा

इस्तीफा हिन्दी कथा साहित्य की प्रथम सीढ़ी प्रेमचंद की कहानियों से प्रारम्भ हुई प्रतीत होती है। तीसरी- चौथी कक्षा से प्रेमचन्द की कहानियाँ जैसे’ बूढी काकी ‘, हामिद का चिमटा ‘, नमक का दरोगा आदि से शुरू होते- होते आत्माराम, कफन, इस्तीफा आदि कहानियों के द्वारा’उच्च स्तर की कक्षाओं तक अपनी अमिट छाप छोड़ती चलती…

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बड़े घर की बेटी

बड़े घर की बेटी भारतीय समाज में भारतीय संस्कारों को सही स्वरूप में जन मानस के समक्ष लाने में मुंशी प्रेमचंद के अवदान को हम “मील का पत्थर” मानते हैं । उनका साहित्य उस आम समाज की कहानी कहता है जो रहता तो हर काल में है परन्तु उसे कलम बद्ध करना अपनी जिम्मेदारी समझी…

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बचपन के चंद लम्हे

बचपन के चंद लम्हे पचास वर्ष से अधिक की जिंदगी को मात्र एक पन्ने में पिरोना नामुमकिन सा लग रहा है, क्या लिखे क्या छोड़े। बहुत सुखद यादों में से २ बाते मां को समर्पित है। जिनको कभी व्यक्त नहीं कर पाई। मेरा जीवन उनके योगदान से पूर्ण है ____ भरा पूरा आंगन ,दादी-बाबा ,चाचा-बुआ…

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सुमधुर भारत वर्ष हमारा

सुमधुर भारत वर्ष हमारा जाने कितनी कवियों ने दोहराई होगी बात पुरानी , आज सुनाता हूँ मैं तुमको नव भारत की नई कहानी। नई पुरानी सभ्यताओं का संगम भारत वर्ष कहाता, यहाँ कभी ना टूटा नई पुरानी संस्कृतियों का नाता। यहाँ जुड़ी है कड़ियां कितने रस्मों और रिवाजों से, यहाँ मिली है धड़कन कितनी धर्मों…

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गांधी समझ नहीं आएंगे नोट मे

गांधी समझ नहीं आएंगे नोट मे.. अगर समझना चाहते हैं, गांधी को तो, झांकिए अपने अंतरात्मा के ओट मे… गांधी समझ नहीं आएंगे नोट मे… सत्य को अब और कब तक? पढ़ते -पढ़ाते रहेंगे पुस्तकों में… एक बार, सत्य को आने तो दीजिए, अपने आचरण व्यवहार मे.. मुस्कुराते दिखेंगे गांधी, अंतरात्मा की ओट मे …….

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राम का राज्याभिषेक

राम का राज्याभिषेक आश्वस्त हैं राम अपने धर्म,सभ्यता और संस्कृति से परंतु आशंकित है वर्षों बाद घर वापसी में, मंथरा का (दासो का) कुनबा पूँछ सकता हैं उनका नाम और जन्मस्थान -!!! सीता तुम पुरूष चित्त से सोचना मानवीय आचरण के राम मर्यादा के पुरूषोत्तम राम तुम्हारे लिए वन वन भटके राम कितना कठिन है…

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