कजाकी

कजाकी मुंशी प्रेमचंद बहुत ही सहज सरल किन्तु असाधारण व्यक्तित्व के मालिक थे. वे अपनी हर कहानी को पहले अंग्रेजी में लिखते, उसके बाद उसका अनुवाद हिंदी और उर्दू में करते इस तरह तीनों भाषाओँ पर उनकी बराबर से पकड़ थी. उन्होंने अपने जीवन की साधारणता की और इंगित करते हुए कहा था की “मेरा…

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FESTIVAL OF LIGHTS

FESTIVAL OF LIGHTS Diwali the most awaited Hindu festival, Celebrated with lights,family reunion treats, Auspicious prosperity, Joyful activities, Shopping clothes,eatables, gifts, sweets. The one thing we forget is our own country, Blindly purchase lamps,tea candles for divinity, L.E.D. light strings,crackers,plastic facilities, Forget all that money goes to other country’s treasury. Diwali was to be celebrated…

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रमजीता पीपर

रमजीता पीपर रमजीता पीपर से गाँव की पहचान है या गाँव से इस पीपल के पेड़ की इसके बारे में दद्दा से ही पता लग सकता है। दद्दा की उम्र बहुत अधिक नही है, यही 70 के लगभग, पर लोग उन्हें दद्दा कहने लगे हैं, शायद उनके ददानुमा कहानियों और बातों के कारण हो, या…

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आगमन

आगमन जिस वक्त द्वार खटखटाया गया भीतर उसके एक मद्धिम दिया जल रहा था द्वार खोल कर देखा तो बाहर विस्मय का धुंआ जोर से उठ रहा था वह भीतर घुस आया और दृढ़ता से अपना हाथ उसकी तरफ बढ़ाया वह फटी आंखों से देखती रह गई ऐसे,जैसे डूबता हुआ आदमी बोलने का प्रयत्न तो…

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My life

MY LIFE VULNERABLE CONSCIOUSNESS As the moments are gone and the time is playing blindflies with the empty moments of the eternity the consciousness is speechless looking for a truth, an answer to the endless questions… (Collection of poems , Dreams of Oasis (Amphictyon of Hellenism, Department of Literature, Thessaloniki, 2014 . The collection was…

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महामारी के दिनों में प्यार !

महामारी के दिनों में प्यार ! कुछ दिनों पहले एक खबर पढ़ी थी कि बिहार के सिवान के एक प्रेमी को मुंगेर में रहने वाली अपनी प्रेमिका याद आई तो वह लॉकडाउन को धत्ता बताते हुए पैदल ही निकल पड़ा मुंगेर की ओर। करीब तीन सौ किमी की पदयात्रा कर वह अपने गंतव्य तक तो…

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फिर से वहीं

फिर से वहीं बैंक खुलने का समय तो दस बजे है लेकिन छोटे से गाँव के बैंक में कौन देखता है। आधा-एक घंटा देरी तो मामूली-सी बात है। अभी चार छह लोग आ गए हैं। बिनय है, उसे अपनी दुकान के लिए लोन चाहिए। आशा देवी हैं, जिन्‍हें सिलाई मशीन खरीदने के लिए लोन चाहिए…

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श्वान

श्वान यह एक अलसाई-सी सुबह थी। उधर सुरमई बादलों के पीछे से झाँकता सूरज बाहर आने से कतरा रहा था और इधर मेरा भी रजाई से बाहर निकलने का मन नहीं था। बादलों के पीछे से आती पीली, मंद रोशनी की किरणें नींद को रोकने का असफल प्रयास कर रही थीं। ऐसा लग रहा था…

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हिन्दी

हिन्दी    मैं भारत की बेटी, आपकी आपनी हिन्दी हूँ हाँ , हिन्दी हूँ मैं हिन्दी हूँ भारतीय संस्कृति सभ्यता के ललाट पर सजी मैं बिंदी हूँ हर कोई मुझे सजा रहा है मुझे वसन नए पहना रहा है शोभा हूँ मैं इस युग की नहीं काग़ज़ की चिन्दी हूँ हाँ , हिन्दी हूँ मैं…

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