बदला सावन

बदला सावन इस बार सावन, कुछ बदला-बदला है। ना उमंग है,ना तरंग है। लागे सब देखो वेरंग है। चारों ओर हाहाकार मचा है। मुँह खोल बिकराल खड़ा है इस बार सावन, कुछ बदला बदला है। बगियाँ फूलों से भरी, पर सूनी-सूनी हैं। ताल-तलैया तृप्त हुऐ, पर प्यासी-प्यासी हैं। इस बार सावन, कुछ बदला-बदला हैं। काले-काले…

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बेबसी

बेबसी शहर से दूर केंद्रीय जेल के ठीक सामने एक बहुत बड़ा मैदान था। मैदान के चारों तरफ पेड़ होने के कारण सुबह और शाम टहलने वाले लोगों के झुंड से यह जगह गुलजार रहा करता था। आज चुनाव का रिजल्ट आने वाला था। जिसके कारण रिटायर लोगों की टहलने वाली मंडली में जोरदार चर्चा…

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आत्मकथा

आत्मकथा आत्मकथा लिखने का विचार जब भी आता अन्तर्मन में एक उथल- पुछल्ले सी मच जाती। बचपन बीता, जवानी बीती,चलते ही रहे, सदा चलते ही रहे, खट्टी-मीठी यादों को समेटे। समय जो मुट्ठी में बन्द रेत सा फिसल जाता है फिर कहाँ वापस आता है।जाने क्या क्या रंग दिखाता है … ज़िन्दगी कभी सहेली कभी…

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हम अब भी आज़ाद नहीं….

हम अब भी आज़ाद नहीं…. आज़ाद हो गया है भारत, हम अब भी आज़ाद नहीं, फल-फूल रहे मुट्ठीभर लोग, सारे हुए आबाद नहीं। है कहां सुरक्षित अब भी, मेरे भारत की हर बाला, वासनांध दुष्‍टों ने जिसका, जीना दूभर कर डाला, अंधेरा रात सा हिस्‍से में आया, हो सका प्रभात नहीं आज़ाद हो गया है…

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हिंदी दिवस

हिंदी दिवस हिंद देश की हिंदी भाषा कितनी है आसान, सूरज जैसी बिंदिया है मेरे भारत की शान। बनाओ राष्ट्र भाषा, करें हम सब अभिलाषा। सबसे प्यारी सबसे मीठी हिंदी हिंद की आन, सूर कबीरा और रसखाना मीरा की पहचान। बनाओ राष्ट्र भाषा, करें हम सब अभिलाषा। भाषाओं की बड़ी बहिन है नहीं किसी से…

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पुत्री को पत्र

पुत्री को पत्र प्रिय तान्या खुश रहो कुछ दिनों से देख रही हूँ तुम बीच बीच में बहुत भावुक हो जाती हो।कल ही तुमने बातों बातों में मुझसे कहा कि माँ कभी-कभी लगता है मैं तुम्हारेजैसी होती जा रही हूँ। अब तो वही सब करने लगी हूँ जिनका मैं कभी मजाक बनाया करती थी। माँ तुम्हारा…

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टिंगू

‘‘टिंगू’’ ‘‘मृदु….. देखो भई कौन है’’ इन्होंने मुझे नीचे के बरामदे से आवाज लगाई. सुबह का अखबार पढ़ते समय तनिक व्यवधान हो तो इनकी आवाज ऐसी ही रूखी हो जाती है. मैं सीढ़ियाँ फाँदती नीचे आई तो देखा कि एक बारह तेरह साल का लड़का साफ धुली हुई हाफ पैंट व टी-शर्ट पहने अपनी माँ…

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‘अब वतन भी कभी जाएंगे..’

‘अब वतन भी कभी जाएंगे..’ ‘अब वतन भी कभी जाएंगे तो मेहमां होंगे’ .. मशहूर शायर मोमिन खां के दिल का दर्द एक दम सच बैठा इंतजार हुसैन साहब पर। इंतजार हुसैन पाकिस्तान के बहुत बड़े अद़ीब हुए हैं। लेकिन उनके किस्से,कहानियों में हिंदुस्तान के प्रति भी उनके बेइंतहा लगाव को देखते हुए कहा जाना…

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भारत और आत्मनिर्भरता

भारत और आत्मनिर्भरता जब विश्व कोरोना वैश्विक आपदा से लड़ रहा था भारत कोरोना को हराने के साथ साथ खुद को आत्मनिर्भर बनाने के सपने संजोए आगे बढ़ रहा था। इस महामारी से पूरी मनुष्य जाति प्रताड़ित थी और इस पर किसी तरह काबू पाने के लिए जूझ रही थी। कारखाने ,दफ्तर सभी निर्माण कार्य…

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